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Saturday, August 2, 2014

हरिद्वार यात्रा भाग १.

दोस्तों वादे के अनुसार एक और धार्मिक यात्रा वृतांत के साथ आप सबके समक्ष हाजिर हूँ पहले हरिद्वार यात्रा का थोड़ा सा जिक्र मुल्तान ज्योत महोत्सव के तौर पर कर चुकी हूँ जिसमें मुख्य बिंदु ज्योत महोत्सव के ही रहे ,अब लेकर आई हूँ हरिद्वार यात्रा संस्मरण और उसके आसपास के दर्शनीय स्थल तो चलिए बढ़ते हैं अपने पहले पड़ाव की ओर ....
हरिद्वार 
पवित्र गंगा नदी के किनारे बसे 'हरिद्वार' का शाब्दिक अर्थ है- 'हरि तक पहुँचने का द्वार'। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, हरिद्वार वह स्थान है जहाँ अमृत की कुछ बूँदें भूल से घडे से गिर गयीं जब खगोलीय पक्षी गरुड़ उस घडे को समुद्र मंथन के बाद ले जा रहे थे। चार स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरीं, और ये स्थान हैं:- उज्जैन, हरिद्वार, नासिक, और प्रयाग| 

हरिद्वार  एक अंतरराष्ट्रीय  तीर्थ स्थान  होने के कारण यहाँ साल भर   लाखों करोड़ों  की संख्या में श्रद्धालू देश विदेश से आते है |




स्थिति :---
हरिद्वार, हरिद्वार जिला, उत्तराखण्ड, भारत में एक पवित्र नगर और नगर निगम बोर्ड है। हिन्दी में, हरिद्वार का अर्थ हरि "(ईश्वर)" का द्वार होता है। हरिद्वार हिन्दुओं के सात पवित्र स्थलों में से एक है। हरिद्वार जिला, सहारनपुर डिवीजनल कमिशनरी के भाग के रूप में २८ दिसंबर १९८८ को अस्तित्व में आया। २४ सितंबर १९९८ के दिन  उत्तर प्रदेश का पुनर्गठन किया गया , और इस प्रकार ९ नवंबर, २०००, के दिन हरिद्वार भारतीय गणराज्य के २७वें नवगठित राज्य उत्तराखंड (तब उत्तरांचल), का भाग बन गया।
भूगोलिक स्थिति :---
३१३९ मीटर की ऊंचाई पर स्थित अपने स्रोत गौमुख (गंगोत्री हिमनद) से २५३ किमी की यात्रा करके गंगा नदी हरिद्वार में गंगा के मैदानी क्षेत्रो में प्रथम प्रवेश करती है, इसलिए हरिद्वार को गंगाद्वार के नाम सा भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है वह स्थान जहाँ पर गंगाजी मैदानों में प्रवेश करती हैं।
पहुँचने के साधन :---
हरिद्वार देश के विभिन्न स्थलों से रेल एवं सड़क मार्ग से जुड़ा है। 
रेल द्वारा :-
दिल्ली से हरिद्वार तक की दूरी रेल द्वारा लगभग 225 किलोमीटर है |
हरिद्वार के लिए दिल्ली से लगभग 20 गाड़ियाँ निकलती हैं जिसका आम किराया 92 रुपये से 160 रुपये तक है थोड़ी सुविधा के साथ इसका किराया लगभग 466 रुपये और 661 रुपये है और थोड़ी और ज्यादा सुविधा के साथ इसका किराया 1083 से लेकर 1103 रुपये तक है |
बस द्वारा :-
बस से हरिद्वार की दूरी लगभग 208 किलोमीटर है डीटीसी बस सर्विस सुबह 7.30 बजे से शुरू होकर रात को 7 बजे तक उपलब्ध है जिसका किराया 143 रुपये है | 
बहुत सारी प्राइवेट बस सेवा भी उपलब्ध हैं जिनका किराया 250 रुपये से लेकर 750 रुपये तक है |
हवाई मार्ग द्वारा :-
विदेशी पर्यटकों के लिए हरिद्वार का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा देहरादून में है जो कि दिल्ली और देश के अन्य मुख्य हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है इसकी हरिद्वार से दूरी मात्र 34 किलोमीटर है और देहरादून के लिए दिल्ली से सप्ताह में चार उड़ानें होती हैं जेट लाइट और स्पाइस जेट द्वारा और इसका किराया लगभग 1000 रुपये है |
अपनी गाड़ी द्वारा :-
बहुत सारे लोग एकादशी,अमावस्या और पूर्णमाशी के लिए हर महीने हरिद्वार जाते हैं इसलिए सुविधा अनुसार अपनी गाड़ी उठाते हैं और चल देते हैं |  
जलवायु :---
तापमान
ग्रीष्मकाल: 15 डिग्री से- 42 डिग्री तक 

शीतकाल: 6 डिग्री से- 16.6 डिग्री तक
ठहरने के स्थान :---
यहां उत्तरांचल सरकार ने पर्यटकों के लिए आवास गृह बनाए हैं। पर्यटक अपने बजट के हिसाब से ठहरने के स्थान का चयन कर सकते हैं। यहाँ लगभग हर धर्म हर प्रान्त की धर्मशाला हैं , बहुत होटल भी उपलब्ध हैं किसी भी धर्मशाला में आप अपने पहचान के आधार पर रह सकते हैं | लगभग सभी धर्मशालाओं में खाने की व्यवस्था रहती है इसलिए आपको घर जैसा खाना मिल जाता है |

वैसे तो हरिद्वार की बहुत बार यात्रा की है लेकिन सेवा भारती के साथ जाने का यह पहला अवसर था | सेवा भारती वर्ष में दो बार अपने शिक्षिकों निरीक्षकों एवं अन्य सदस्यों को यात्रा पर लेकर जाता है जिसमें शिविर या अभ्यास वर्ग भी लगाया जाता है पर इस बार की यात्रा एक स्वतंत्र यात्रा के रूप में थी | सेवा भारती के साथ हरिद्वार का कार्यक्रम पूर्व नियोजित था इसलिए हमारी जनशताब्दी देहरादून से आने जाने की टिकटें पहले से बुक कर ली गई थीं | 13 जून को हमारा जाना और 16 जून को हमारी वापिसी निश्चित की गई थी |

सेवा भारती :---
सेवा भारती वैसे तो किसी परिचय का मोहताज नहीं परन्तु जिनका कभी इससे परिचय नहीं हुआ तो उनके लिए इतना कहना है कि यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा चालित एक प्रकल्प है जो मुख्यतः बनवासी क्षेत्रों में कार्य करता है | पूरे देश में इसके लगभग एक लाख से ज्यादा केंद्र कार्यरत हैं |
मुख्य कार्य :--- इसके मुख्य कार्य शिक्षा, संस्कार, सामाजिक जागरूकता, धर्म-परिवर्तन से वनवासियों की रक्षा आदि हैं | इसमें मुख्यता बाल संस्कार , महिलाओं के लिए सौन्दर्य प्रसाधन की शिक्षा ,सिलाई की शिक्षा एवं कंप्यूटर की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है | 
पहला दिन 
हम कुल 105 लोग थे जिसमें पश्चिमी जिले के छः विभाग के कार्यकर्त्ता ही सम्मलित थे | सबको अपने आप नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंचना था | हमारी गाड़ी का चलने का समय था दोपहर 3.25 का इसलिए इस भीषण गर्मी से पार पाने के लिए घर से रिक्शा कर मेट्रो लेना ही उचित समझा ठीक 2.14 बजे हम मेट्रो में बैठ चुके थे .....
राजीव चौक से येलो लाइन बदल कर एक स्टेशन बाद ही हम नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर 2.45 पर पहुंचे | यहाँ से बाहर निकल कर हमने प्लेटफोर्म संख्या 11 का रुख किया यहाँ पर हमारी गाड़ी जन शताब्दी लग चुकी थी ,पर यहाँ की अव्यवस्था ,बहुत सारी सीडियां और कोई भी लिफ्ट ना होने के कारण हम 3.14 पर ही गाड़ी के अन्दर पहुँच पाए | इतने में हम पसीने से लथपथ हो चुके थे जिसे सूखने में काफी देर लगी गाड़ी अपने निर्धारित समय पर चल चुकी थी | 
          हम सब अपनी अपनी सीट पर बैठ चुके थे | गाड़ी वाताअनुकूलित नहीं थी इसलिए काफी गर्मी रही पर बातों में सफ़र कट गया पता ही नहीं चला गाड़ी का पहुँचने का समय था शाम 7.35 पर ,लेकिन 45 मिनट की देरी से पहुंची यानि 8.14 पर | 
हम हरिद्वार स्टेशन पर उतर चुके थे और यहाँ की जो सबसे अच्छी बात रही वोह यह की यहाँ पर कोई सीढ़ी ना होकर केवल स्लाइड ही थी जिससे सभी वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को और सबको ही उतरने में बहुत सुविधा रही | प्लेटफॉर्म से बाहर निकलते ही स्टेशन के बरामदों में और बाहर भी नजारा कुछ इस तरह था सब ने अपना रैन बसेरा बना रखा था और जमीन पर चादरें बिछा कर आराम से सो रहे थे |




जब सभी इक्कट्ठे हो गए तो स्टेशन से बाहर निकल धर्मशाला तक जाने का कार्यक्रम शुरू हुआ | कुछ ऑटो जिसमें सात सीट होती हैं वहीँ पर सात सात लोगों को लेकर धर्मशाला पहुँचने लगे जिसका हरेक को 30 रुपये किराया देना था | 
हमारी धर्मशाला दूधाधारी मंदिर के सामने आश्रम बाबा जोध सचियार जोकि ऋषिकेश जाने वाले प्रमुख मार्ग पर स्थित थी जिसमें सेवा भारती द्वारा पहले से व्यवस्था की गई थी | 


सबको कमरे मिल जाने के बाद सबने सामान रखा और पहुँच गए भोजनशाला में यहाँ खाने की व्यवस्था की गई थी |
भोजन के बाद सभी अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए |

हरिद्वार यात्रा भाग 2.क्रमशः.....
 
      लेखिका :--- सरिता भाटिया